कालका शिमला रेल की सैर |पैदल यात्रा |Pahadibanda

गर्मियों के दिन थे |टॉय ट्रेन मैं मुसाफिरी करने का मन बनाया झटपट सामान बंधा कालका स्टेशन पहुच गये स्टेशन पहुँचने पर पता चला की ट्रेन तो फुल थी गर्मियों की छुटियाँ के कारण ट्रेने फुल चल रही थी मेरे साथी चंदर भान और मैंने फिर पैदल ही यात्रा करने की ठानी और चल पड़े लाइन के बिलकुल साथ साथ |

कालका स्टेशन के नैरो गेज प्लेटफार्म से चल दीयेस्टेशन खत्म होते ही डीजल लोको शेड आया उसका भ्रमण किया रेलवे के कार्मचारी एक इंजन की ओवरहालिंग करने में वियास्त थे साथ के एक लाइन मैं ट्रैक इंस्पेक्शन मैं इस्तमाल होने वाली ट्राली भी देखीउसकी बाद लाइन के साथ साथ चालते चले थोड़ी ही देर बाद आर्मी एरिया मैं ट्रैक पहुच गया कालका स्टेशन से निकलते ही रेल लाइन दोनों तरफ से आर्मी कैंटोनमेंट से घिर जाती है ये ऊँची ऊँची कंटीले तारे लगी है दोनों तरफ एक किलीमीटर तक ट्रेन आर्मी एरिया के बीचो बीच चली रहेती है फिर थोड़े देर चलने के बाद कालका शहर छोड़ते ही हम हिमाचल की सीमा मैं प्रवेश कर गये हिमाचल मैं घुसते ही पहाड़ेया शुरु हो जाती हैंमोड़ ही मोड़ मेरे साथी चंदर भान तो वही हांफ गये थोडा पानी वानी पिलाया,फिर चल पडे थोड़ी सी आगे परवाणू का इंडस्ट्रियल एरिया शुरु हो गया इस दोतीन किलोमीटर के रास्ते में तरह तरह की फैक्ट्रीज कारखाने है|

थोड़ी सा और चलने पर हमारा पहला पड़ाव टकसाल स्टेशन आगया बिलकुल इंडस्ट्रियल एरिया से सटा हुआ थोड़ी देर विश्राम किया फोटोज वगेरा ली और फिर चल दीये आगे चलते चलते सुरंगे आना शुरु होजाती है ऊपर पहाड़ो से नीचे कालका वे चंडीगढ़ का बहुत ही आछा नजारा देखने को मिला ऊपर चड़ते चड़ते आबादी घटती जा रही थी छोटे मोटे गाँव बस और कुछ नहीं ना कोई सड़क ना कुछ बस पकडनी हो तो इन लोगो को दो तीन किलोमीटर नीचे हाईवे पर जा के बस मिलती है दुसरा साधन ट्रेन का है पर वो सीमित सा है दिन मै सिर्फ दो ट्रेन |घुम्मन स्टेशन क्रॉस किया तो नीचे हाईवे साथ साथ ही चल रहा था रास्ते मैं कई जगह रुके और फोटो भी लिये ,कभी ट्रैक पर लेट कर कभी पहाड़ी पर चढ़ कर थोड़ी देर मैं एक ट्रेन के आवाज सुनाई दी आस पास देखा तो पता चला कालका के तरफ से ट्रेन आ रही थी ट्रेन के साथ सेल्फी खीचने का विचार हुआ कैमरा ओन किया और ट्रैक के थोड़ी से बगल मैं शुरु होगये ,ट्रेन के आते ही सेल्फी लेने लगे ड्राईवर भी हस दिया और हाथ हिलाया ,ट्रेन चली गयी|

फिर हमने भी दुबारा चलना चालू किया कोटी स्टेशन पहुंचे थोडा आराम किया फोटो वगेरा खिंचे इस रेलवे लाइन की दुसरी सबसे लम्बी सुरंग स्टेशन के बिलकुल साथ ही शुरु हो जाती है फिर उठे और चल दीये घुस गये सुरंग मै घुसते ही कुछ अलग ही आएह्सास हुआ बाहर से काफी ठंडक थी अंदर पानी भी टपक रहा था चलते गये और दुसरी और पहुँच गये ,थोडा पैदल चलने के बाद बैग से चिप्स का पैकेट निकाला और खाने लगे ,आराम किया फिर चलने लगे कुछ फोटोज ली रास्ते मैं फिर चलने लगे ,फिर चलते चलते थकावट के कारण हमारी बस होगयी फिर विचार विमर्श करने के बाद सोनवारा स्टेशन से दो बजे की ट्रेन से वापिसी का निर्णय किया सोनवारा स्टेशन पहुच कर कालका की टिकटें ली और प्लेटफार्म पर बैठ गये थोड़े देर मै ट्रेन आयी बैठने के सीट न होने के कारण हमे ऊपर से खुली बिना छात वाली बोगी मैं बैठानी का मौका प्राप्त हुआ |हम चढ़ गये और गार्ड ने झंडी देखाई और ट्रेन चल पडी मोड़ो पी बल खाती सुरंगों से निकलती हुयी ट्रेन चले जा रही थी सारे स्टेशन निकालते गये और ट्रेन रुकती रुकाती दो घंटे बाद कालका पहुच गयीवहां पहुच के आराम मीला |

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