दक्षिण भारत की यात्रा |पांच राज्य -बारह दिन|Pahadibanda

जब मे लुधियाना पंजाब में ट्रेनिंग कर रहा था तो हमारा इंडस्ट्रियल टूर बना दक्षिण भारत का  |सभी सह-पाठी  कुल तीस बन्दे थे  हम ,साथ मे दो इंस्ट्रक्टर भी थे हमारे | इंडस्ट्रियल टूर तो क्या था मौज मस्ती और घुमने फिरने ही होना था | हम पंद्रह दिन में पांच राज्य घुमने वाले थे | सब से पहले दिल्ली फिर वहां से कर्नाटक वहां से तमिलनाडू गोवा महारास्ट्र जाना हुआ | आंध्र प्रदेश भी जाना था पर उन दिनों तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की मांग के कारन हमने वहां जाना बाईपास कर दिया | रेल में वेटिंग से बचने के लिये हमने सारी टिकेट करा ली थी तीन महीने पहले करा ली थी।

पहला दिन

16 तारीख  की ट्रेन थी | हफ्ता पहले से ही तयारी शुरु होगई थी |यात्रा के लिये उत्साहित तो सभी काफी दिनों से  थे | 12716 सचखंड एक्प्रेस जो सुबह  8 बजे करीब लुधियाना से चलती हें  वो पकडनी थी हॉस्टल से ऑटो मे स्टेशन को निकले स्टेशन पर पता चला ट्रेन आधा घंटा देरी से चल रही थी स्टेशन पर ही सभी वेट करने लगे |भीड़ काफी थी | ट्रेन जब आयी तो सभी ट्रेन में अपनी सीट पर बेठ गए |ट्रेन थोड़ी देर में चल पढी | में मेरे ख़ास दोस्त वासु तरुण तेजिंदर हम साथ बैठे थे | ट्रेन चल रही थी ,हम बाते चीते कर रहे थे | फिर तरुण को भूख लगी वो लुधियाना का ही रहने वाला हे वो घर से खाना ले कर आया था हम सब हॉस्टल वाले भूखे थे क्यूँ की सुबह सुबह हॉस्टल में कुछ बना नहीं था इस लिये सब उसके खाने पर टूट पड़े| खाना खाने के बाद बाते चीते की फेर तेजिदर के टैब पर फिल्म देखने लग्गे टैब तक अम्बाला निकल चुक्का था दस से ऊपर था टाइम |  फिर वासु ने बोला मुझे नींद आरही हे मे सोने जा रहा हूँ वो ऊपर बार्थ पर सो गया |फिर हम ताश खेलने लग्गे | खेलते खेलते बोर होने लगे , तो बाकी दोस्तों को देखने चल पड़े वो साथ वाली सीटो पर ही थे ,कोई ताशा खेल रहा था कोई हेड फ़ोन लगा कर गाना सुन रहा था , कोई फेस बुक चला रहा था कोई सो रखा था | थोड़ी देर बाद वापिस सीट पर आ गये | खिड़की से बाहर का नजारा देखने लगे | दिल्ली नजदीक थी ,इस ट्रेन में हमारा दिल्ल्ली तक का ही टिकेट था |दुपहर करीब दो बजे का टाइम था | शाम की अगली ट्रेन थी बंगलोरे की रात की कर्नाटका एक्सप्रेस तब तक दिल्ली भ्रमण करना था|कुछ देर बाद ट्रेन न्यू दिल्ली पहुँच गयी सभी उत्तर गए | फिर सभी cloak रूम की  तरफ चल पड़े सभी ने सामान जमा कराया , और इंस्ट्रक्टर दुवारा 8बजे  वापिस इधर ही मिलना तय किया | सभी दो तीन  के ग्रुप में निकल पड़े , कोई connaught पैलेस , कोई लाल किला  कोई इंडिया गेट | जायदा से जायदा जगह देखने की कोशिश थी सभी की |हम लोग तो पहले चांदनी चौक गए लाल किला देखा सीसगंज गुरुद्वारे फिर मेट्रो पकड़ी राजीव चौक फिर वहां घुमने लग्गे ,पालिका बाज़ार  थोड़ी शौपिंग की |पोने आठ के करीब हो रहे थे  आठ बजे स्टेशन पहुंचना था | मेट्रो पकड़ स्टेशन पहुँच गए |क्लोअक रूम से सामान लिया और अपने प्लेटफार्म को निकल पड़े| ट्रेन  पल्त्फोर्म पर लगी हुयी थी …सभी अपनी अपनी सीट लेने लगे | अपने निर्धारित समय पर ट्रेन चल पडी | थोड़ी बहुत गप्पे ठूस के सभी सो गए|
दूसरा दिन   

दूसरा दिन ट्रेन में ही गुजरा जब सुबह  सुबह उठे भोपाल के आसपास थी ,कैटरिंग वाले  कॉफ़ी काफी चाय चाय बोलते हुए घूम रहे थे | भोपाल पहुँचते ही  कुछ लोग उत्तरे और कुछ चढ़े भी| दुसरे दिन ट्रेन में गुज़री दिन भर बहार खिड़की से ग्रामीण भारत के नज़ारे देखते रहे |जब ट्रेन महारास्ट्र में कही थी तो हमने ट्रेन से केले की खेती भी देखी |कॉपर गाँव में मसाला चाय पीने को मीली क्या चाय थी ….अभी भी याद हे | 

उबी सिटी मॉल

तीसरा दिन    

तीसरा दिन सुबह उठे आंध्र प्रदेश में कही थी …..शायद गूटी गुन्ताकल के आसपास…..नास्ता किया डोसा सांभर …ट्रेन में इंतना बढ़िया होता नहीं हे पर क्या करे खाना पड़ता हें |दूपेहर एक डेढ़ बजे के करीब बंगलोरे पहुंचे |2409 का सफ़र पूरा कर तीसरे दिन पहुँच ही गए बंगलोरे| पहुँचते ही होटल देखने लगे ….जा के ट्रेवल एजेंट केपास  गए …….टोटल चार दिन का पैकेज निर्धारित कर लिया गया ……..गाइड होटल बस आदी सब था पैकेज में |उस दिन तो हम बंगलोरे ही रुके …होटल होगया था …..वहां रूम में चले गए …. सभी ट्रेन के सफ़र में थक गए थे शाम तक सोने का निर्धारित किया |जब उठे नहा धो के बंगलोरे देखने निकल गए …… पहले तो पेट पूजा की …बड़ी मुश्किल से नार्थ इंडियन खाना मिला जायदा तर इडली डोसा ही चलता हें….. खाना खाया  फेर ub सिटी मॉल देखने निकल गए मॉल सब कुछ अंदर ही होटल से ले के जिम रेस्टोरेंट  सब खूब घुमे …..फिर रात बढ़ने लगी तो होटल वापसी का निर्धारित किया क्यूंकि सुबह हमे टूर पैकेज के आनुसार mysore के लिये  निकलने था …. होटल पहुँच कर सब सो गए …….

चोथा दिन 

श्री रंगपत्न टेम्पेल

अगली सुबह सब जब उठे तो भूखे प्यासे ही तयार हो कर बस में चढ़ गए ….पहले ही बहुत जयदा लेट होगये थे …दिन में घूमना भी बहुत था | चल पडी बस…..mysore की तरफ ….पहले श्री रंग पटना गए ये जगह अपने रंग नाथ स्वामी  टेम्पल के लिये फेमस हे सब देख कर चल पड़े फिर देखा mysore का किला …क्या बढ़िया किला हे बहुत आछे  से मैनेज किया गया  हें ……. गाइड ने  पहुँचते ही बस में किले के बारे में बता दिया ……किले को अंदर से नेहारा  सब देखा | वहां पर दुकानों पर सब चंदन का ही सामान था साबुन से ले के अगर बाती पेंसिल पेन थोडा बहुत सामान खरीद कर वापिस बस में चढ़ गये | वहां से गाइड हमे एक रेस्टोरेंट में ले गया …. दल भात खाया साथ में पापड़ और रसम भी थी |  खाना खा के हमने mysore में अपने होटल में सामान रखा और फिर mysore सेहर घुमने निकल पड़े वहां चर्च देखा मार्किट देखी चंदन की लकड़ी से बना सामान  आदी |रात तक घूमते रहे फिर डिनर करके रूम में आगये रूम में गप्पे लड़ाए फिर थक हार के सो गये |

पांचवा दिन

सुबह फिर जब उठे तो हमारी बस आगयी थी …..सब फटा फट नास्ता करके बस में चढ़ गये |आज हम ऊटी निकल रहे थे |बस चल पडी …बस हाईवे पर चली जा रही थी ……. बन्दीपुर नेशनल पार्क आने से पहले हम सभी से बस वालो ने एक कागज पे sign ले ली थी उसके आगे उनकी कोई जिमेवारी ना थी क्यूँकी ये वीरापन का जंगल था …..आप सभी जानते ही होंगे कोन हे वो ……अब तो वे आदमी जिन्दा नहीं हें फिर भी लोगो में डर हें |आभी भी लूट पाट के मामले सामने आते हे |नेशनल पार्क में घुस गयी बस … वहां कई प्रकार के जानवर देखे सड़क बिलकुल बीच से गुजरती हे |  

कर्नाटका के एरिया को बन्दीपुर नेशनल पार्क बोलते हे बॉर्डर क्रॉस करते ही मदुमलाई पार्क तमिल नाडू वालो का सुरु होजाता हें | इस रोड पर रात को आवाजाही बंद रहती हें | आठ बजे के बाद नो एंट्री ……काफी आछी जगह हे बस से ही काफी फोटोग्राफी की तमिल नाडू का ग्रामीण इलाका देखने को मिला दूप्हेर एक दो बजे के आसपास ऊटी पहुंचे होटल में सामान रखा …फिर खाना खाने बस वाले अपने निर्धारित ठीखाने पर ले गये पैकेज का यही नुकसान होता हे सब एजेंट की मर्जी चलती हे जब हम सस्ते में सब कुछ कर सकते हे ……हम इनके दुवारा लुटते हे | खाना खाया शाही पनीर  मिक्स वेजिटेबल |उसके बाद मार्किट घूमी ऊटी की निलगिरी चाय के कुछ पैकेट घर के लिये लिये | ऊटी की होम मेड चोकलेट भी बहुत आछी हें जाये तो जरुर खाये| शाम को बोटैनिकल गार्डन गए शाम पुरी वही गुज़री फोटोग्राफी आदी की | मार्किट घूमी रात को फिर रोटी खाई होटल में जा कर सोगये |

छठा दिन

अगले दिन उठे पहले नहाए दोहे फिर नास्ता करने चले गए …..फिर से वही मसला डोसा….इडली| नास्ता करके बस में चढ़ गये ऊटी में बहुत आछी लेक हे वहां चल पड़े  वहां पहुँच कर लेक की सुन्दरता नेहारी ……बोटिंग भी की फोटो भी खिंची |

                              सुसाइड पॉइंट
लेक के साथ लगता धागे दुवारा बनी चीजो का संग्रहालय भी देखा ….. उसको देखने के बाद वर्ल्ड हेरिटेज साईट निलगिरी माउंटेन रेलवे की सफर करना निश्चित किया स्टेशन पहुँच कर टिकेट लिया बस वाले को कोनोर स्टेशन बुला लिया हम कोनोर तक ट्रेन में जाने वाले थे | ट्रेन अपने टाइम पर चल पडी |ये रेलवे लाइन इंजीनियरिंग का आद्भुत नमूना हें | काफ्फी आछा व्यू मिलता हे सफर के दो रान | आस्ते आस्ते ट्रेन चली जाती हे थोड़ी देर में हम कोनोर पहुँच  गये | वहां से बस वाला लंच के लिये ले गया | साउथ इंडियन थाली खाई  चावल भात पापड़ रसम… उसके बाद बस में चल दीये चाय की फैक्ट्री देखने …..फैक्ट्री देखी सभी प्रोसेस देखा …..फिर sucide पॉइंट देखने गए क्या नजारा था वहां का चारो तरफ पहाड़ और खाई | डॉलफिन नोज पॉइंट देखा …..शाम के टाइम फिर  चाय के बगीचे में बैठ कर चाय पी ..फिर ऊटी की और निकल पड़े ….होटल से सामान उठाया और उसी बस दुवारा नाईट सफ़र करते हुए बंगलोरे को निकल पड़े|

सातवा दिन

सुबह बंगलोरे पहुँच गये | आज बंगलोरे ही घूमना था |होटल सामान रख कर नहा धो कर घुमने निकल पड़े| पहले विस्वेसेर्य साइंस म्यूजियम  देखा तीन चार घंटे तो म्यूजियम में ही लग गये |  फिर टीपू सुल्तान का पैलेस देखा |उसके बाद बंगलोरे बाज़ार में घुमने निकल पड़े |घरवालो के लिये कुछ गिफ्ट भी लिये | छे बजे के करीब का टाइम था …फिर बस में चढ़ होटल के लिये निकले सब सामान उठाया और येस्वंतपुर बंगलोरे स्टेशन के लिये निकल पड़े | आठ बजे की ट्रेन थी गोवा की  एक घंटा लेट थी …फिर हमने स्टेशन पर ही डिनर करने का नेर्धरित किया irctc के रेस्टोरेंट में पहुँच गए |आर्डर दिया ….खाना आया तो सब खाने टूट पड़े …. ख़त्म करके सभी पल्त्फोर्म पर इंतजार करने लगे ट्रेन आयी सब अपनी सीट पर लेट गए …..सब को कल गोवा पहुँच कर बीच देखने की तामना थी | ट्रेन चली सब सो गये |

आठवा दिन 

सुबह सुबह जब उठे तो ट्रेन कैसल रॉक स्टेशन पर थी |यहाँ से आगे गोवा राज्य सुरु होजाता हें |और रस्ते में चेन्नई एक्सप्रेस फिल्म वाला दुध्सागर फॉल भी आता हें | कई लोग तो यहाँ से ट्रेक करते हुए फाल्स तक जाते हें |काफी आछा नजारा देखने को मिलता हें |दूध सागर में ट्रेन जब रुकी तो फोटो भी खींची कुछ लोग वहां उतरे भी कुछ चढ़े | फिर ट्रेन चल पडी एक बजे के करीब ट्रेन वास्को पहुँची |उतर कर होटल की तलाश में भटकने लगे | एजेंट टाइप आदमी आस पास भटकने लगे पर हम ठहरे थे गरीब आदमी सस्ते की तलाश में भटक ते रहे | फिर जा कर calungate बीच के पास हमे रेट जमा और वही रुके  शाम होगयी थी … सब नहाने दोहोने लगे ….फिर निकल पड़े गोवा की गलियों में बीच पर |गोवा में दिन रात सब एक ही है|गाना बजाना चला रहता हें रात भर |अंग्रेज तो बहुत आते हें | देसी भी काफी …बीच का नजरा गजब था | ओपन एयर रेस्टोरेंट गाना बजाना नाचना सब चला हुआ था | उस दिन रात को हमारे कुछ साथीयो  के साथ एक पंगा भी होगया था ……पंजाबी गाने बजाने को ले कर | कुछ दोस्त दी जे वाले को पंजाबी गाने लगाने को बोल रहे थे वो नहीं लगा रहा था तो उन में बहस होगयी …..और नोबत हतापयी तक आगयी पंगा होगया ता बहुत जादा …. हमारे दो तीन साथीयों को उन्हों ने रेस्तौरंट वालो ने कुटा उनके कुछ बन्दों को हमने कुटा ……फिर हम सब भाग खड़े हुए |सब इधर उधर भाग खड़े हुए |बारा एक बजे तक छुपते छुपते अपने होटल तक पहुंचे …..कुछ मित्रो ने तो रातो रात ही गोवा छोड़ने का प्लान बना लिया था इतने डरे हुए थे …….समझा बुझा के एक दुसरे को सब सो गए ….पुलिस केस आदी का डर था पर कुछ नहीं हुआ सुबह उठे ……नास्ता किया  घुमने निकल……… बागा बीच अंजुना बीच नार्थ गोवा की सारी बीच देखी| मार्किट  भी घूमी |कुछ शौपिंग वोपीगं की और घूमते रहे गोवा में|

नोंवा दिन

सुबह उठे नास्ता किया फिर वही डोसा इडली खाया …..डोसा खा कर अब सब उब सा गये थे …पर भारत के साउथ में जाओ और डोसा इडली ना खाओ तो यात्रा आधूरी जैसी होती हें |उसके बाद हम होटल से बैग वेग उठा कर बस मे डाल लिया क्यूंकि आज शाम को ही हमे मुंबई के लिये निकलना था …..बस में चल दीये पहले वास्को सेहर देखने निकले फोटो  भी लेते रहे …..बाजार में घुमे चर्च आदि भी देखे फिर साउथ गोवा की और चल पड़े वहां की बीचेस देखने पालोलेम मोजर्म कावोलेस्सिम बेनौलिम बीच फोटोस लेते रहे अलग अलग पोस्ज़ बना के ……फिर दुपेहर की रोटी खाई बीच पर मस्ती की | हमारा रिजर्वेशन मडगांव से कोंकण कन्या एक्सप्रेस में था जो चार पेंतालिस पर मडगांव से निकलती थी में था | सब कुछ देख के हम बस में चल दिये मडगांव स्टेशन चार बजे पहुँच गए ……ट्रेन जब आयी तो उसमे चढ़ गए ट्रेन चल पडी कोंकण रेलवे देखने का सपना भी पूरा होगया | मुंबई मडगांव रूट देख लिया | कोंकण रेलवे में बहुत सी सुरंग हें | रेलवे लाइन कोस्टल एरिया के साथ साथ चलती हें| हम गोवा से रात के  खाने के लिये रोटी पैक करवा ली थी वही खाई ….और गप्पे मार के और गोवा को याद करके सो गए |

दसवा दिन 

सुबह छे बजे पहुँच गये छत्रपति शिवाजी टर्मिनस ट्रेन से उत्तर कर हम चुनाभट्टी में msme मिनिम्स्ट्री जहा हम ट्रेनिंग कर रहे थे वहां का एक इंस्टिट्यूट यह मुंबई में भी है वहां रहने का फ्री प्रबंद होगया था वहां गए  सामान रखा नहाये धोये और उनकी मेस में वेसल पाव खाया और मुंबई देखने निकल गए ….मरीन ड्राइव देखा फिर गेटवे ऑफ़ इंडिया ताज शाहरुक खान का बंगला देखा फिर बिग बी देखने गए …….घूमते रहे दिन भर मुंबई

गयारवा दिन 

आज का हमारा एस्सेल वर्ल्ड में दिन बताना निश्चित था | सुबह ही नास्ता करके वहां पहुँच गए बोट दुवारा उनकी आइलैंड पर पहुंचे …टिकेट लिया पहले वाटर पार्क दुप्हेर तक फिर शाम के टाइम एडवेंचर पार्क राइड्स ली सब खत्म करके वापिस इंस्टिट्यूट पहुँच गए रात वही कटनी थी सुबह की ट्रेन थी मुंबई से वापसी घर के |

अगली सुबह उठे नास्ता पानी किया | और तयार होकर स्टेशन को निकल पड़े | ट्रेन पल्त्फोर्म पर लगी हुयी थी चढ़ गए | ट्रेन टाइम पर चल पडी ….. गुजरात राजस्थान देल्ली हरयाणा होते हुई ट्रेन ने हमे अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच गयी |

यात्रा खर्चा –

10000 के आस पास लग गया था |

रहना खाना घूमना फिरना ट्रेन का  टूर पैकेज बंगलोरे ऊटी वाला सब इसमे हें |

घर के लिये लिया गया सामान शोपिंग गोवा काजू ऊटी चोक्लेट चाय पाती

 

घूमते रहे खुश रहे 

Thread gardenथरीड गार्डन

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